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जब हरेली पर न्याय पहुँचा गाँव की गलियों तक बैलगाड़ी बनी Justice on Wheels

 

जब हरेली पर न्याय पहुँचा गाँव की गलियों तक बैलगाड़ी बनी Justice on Wheels

दुर्ग। हरेली का त्योहार था, गाँव निकुम में सुबह का माहौल कुछ अलग था। इस बार खेत-खलिहान के साथ न्याय और कानून का संदेश भी गाँव की गलियों में उतरने वाला था।
ग्राम पंचायत भवन से शुरू हुई इस अनूठी पहल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग श्री के० विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री भूपेश कुमार बसंत एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर ग्रामीणों के बीच पहुँचे। न्यायिक अधिकारियों तथा प्रशिक्षित कम्यूनिटी मीडियेटर्स ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए बताया कि हर छोटी बात को विवाद और हर विवाद को मुकदमे में बदलना जरूरी नहीं कई समस्याओं का समाधान बातचीत, समझ और आपसी सहमति से भी संभव है।
इसके बाद शुरू हुआ कार्यक्रम का सबसे अनोखा अध्याय। कोई महँगा प्रचार वाहन नहीं, कोई बड़ी स्क्रीन नहीं। हरेली की सजी-धजी पारंपरिक बैलगाड़ी बनी ‘Justice on Wheels’।
बैलगाड़ी में न्यायिक अधिकारी सवार हुए तथा कम्यूनिटी मीडियेटर्स, ग्रामीण, कल्याण लॉ कॉलेज के अध्यापक एवं विद्यार्थी तथा पैरालीगल वालेंटियर्स के साथ निकल पड़े गाँव की गलियों एवं मोहल्लों में। रास्ते में लोगों से संवाद हुआ, कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई और सामुदायिक मध्यस्थता, नशामुक्ति, बाल संरक्षण, महिला अधिकार, साइबर सुरक्षा एवं अन्य सामाजिक-विधिक विषयों के संदेश पहुँचाए गए।
इस दौरान न्यायिक अधिकारियों ने पौधारोपण कर हरेली की हरियाली को न्याय एवं सामाजिक सौहार्द के संदेश से जोड़ा। इस पहल की खासियत यही थी कि न्याय की जानकारी स्वयं गाँव तक पहुँची। परंपरा और नवाचार का यह मेल ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बना और युवाओं ने भी इसे उत्साह के साथ अपनाया।
ग्राम निकुम की यह पहल केवल विधिक जागरूकता कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि यह संदेश बन गई कि न्याय की शुरुआत कभी-कभी न्यायालय की इमारत से नहीं, बल्कि गाँव की चौपाल और एक सार्थक संवाद से होती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की यह पहल सामुदायिक मध्यस्थता को जन-जन तक पहुँचाने और विवाद-मुक्त, जागरूक एवं न्याय-सशक्त समाज की दिशा में एक अभिनव कदम है।

 

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