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दुर्ग जिला को जल संरक्षण में मिला 16वां स्थान 25 लाख रुपए का ईनाम पानी बचाने की मुहिम में दुर्ग जल संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में मिला पुरस्कार…

दुर्ग जिला को जल संरक्षण में मिला 16वां स्थान 25 लाख रुपए का ईनाम पानी बचाने की मुहिम में दुर्ग जल संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में मिला पुरस्कार…

रायपुर. उत्कृष्ट प्रदर्शन करते जिला दुर्ग हुए ने एक बार फिर अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज कराई है। जल शक्ति अभियान के तहत उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए दुर्ग जिले ने इंस्ट जोन कैटेगरी 3 में 16 स्थान प्राप्त किया है । इस उपलब्धि के लिए 18 नवम्बर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल में आयोजित राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह में जिले को सम्मानित किया गया। जल शक्ति अभियान की शुरुआत 1 जुलाई 2019 को जल संकट और जल संरक्षण की राष्ट्रीय चुनौती के समाधान के लिए की गई थी,
राष्ट्रीय जल पुरस्कार में संवर्ग 03 में दुर्ग ज़िले को जल संरक्षण की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्य के लिए माननीय केंद्रीय मंत्री जी के हाथों प्रशस्ति पत्र एवं 25 लाख रुपये का पुरस्कार प्राप्त हुआ। कलेक्टर सर के कुशल मार्गदर्शन में एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देश में जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर इतिहास रचा है। जल संचय जनभागीदारी 1.0 (JSJB) के परिणामों में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि जल प्रबंधन और जनभागीदारी के संगम का जीवंत उदाहरण है। प्रदेश में अब तक 5010 कार्य पूर्ण कर जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन में बदल दिया गया है। दुर्ग जिला को उनकी उत्कृष्ट भागीदारी के लिए ₹25 लाख के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। यह दर्शाता है कि जल संरक्षण को प्राथमिकता के साथ अपनाया गया है।
दुर्ग की यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि जब जिला प्रशासन और जनता मिलकर कार्य करें तो असंभव भी संभव हो जाता है। श्रैश्रठ 1.0 की सफलता ने न केवल सम्मान दिलाया है, बल्कि इसे जल प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल भी बना दिया है।
जलसंकट से निपटने के लिए दुर्ग जिले ने साबित कर दिया कि मोर गांव, मोर पानी और एकेच गोठ एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी, केवल नारा नहीं, बल्कि काम का तरीका है। जेएसजेबी-जल संचय जनभागीदारी अभियान में देशभर में दुर्ग को छत्तीसगढ़ जोन-2 की केटेगरी-3 में 16वां स्थान मिला है। इस उपलब्धि के लिए जिले को 25 लाख रुपए का पुरस्कार मिलेगा।
दुर्ग जिला ने कलेक्टर अभिजीत सिंह मार्गदर्शन में जिला पंचायत सीईओ बजरंग दुबे के निर्देश में वर्षा जल संचय और जल संरक्षण के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। महात्मा गांधी नरेगा के तहत जल जीवन मिशन के अंतर्गत रनिंग वाटर क्षेत्र में सोक पिट का निर्माण किया गया। जनपद पंचायत दुर्ग में 70, धमधा में 101 और पाटन में 55 सोक पिट बनाए गए। इसके साथ ही रिचार्ज पिट निर्माण में दुर्ग में 43, धमधा में 92 और पाटन में 73 पिट बनाए गए।
जिला पंचायत के सीईओ बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि जल संरचनाओं के निर्माण से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि ग्रामीणों को बड़ी मात्रा में रोजगार भी मिला। इसके अलावा, जिले में लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने के लिए मोर गांव मोर पानी, एकेच गोठ एकेच बानी जैसे अभियान चलाए गए। जिले में अब तक 123 अमृत सरोवर बन चुके हैं और दूसरे चरण में 7 और सरोवर बन रहे हैं। पीएम आवासों और अन्य स्थानों पर कुल 2854 सोक पिट का निर्माण किया गया है।
300 ग्राम पंचायतों में 68 स्थानों पर 16,120 सोख्ता गड्डा तैयार किया गया। 423 हैंडपंप जिनका जल स्तर गिर गया था, उन्हें रिचार्ज किया गया। इन प्रयासों से दुर्ग जिले में जल संरक्षण और जल संचय का एक मजबूत ढांचा तैयार हुआ है। यह न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक और सक्रिय भी बनाएगा।

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