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जनभागीदारी से दुर्ग में जल संरक्षण को मिली नई रफ्तार* तालाब गहरीकरण, चेकडेम, डबरी, WAT और स्वप्रेरण से सोक पिट से गांवों में बढ़ी जल संचयन क्षमता; 2,726 सोक पिट और 66,500 ट्रेंच तैयार…

जनभागीदारी से दुर्ग में जल संरक्षण को मिली नई रफ्तार*
तालाब गहरीकरण, चेकडेम, डबरी, WAT और स्वप्रेरण से सोक पिट से गांवों में बढ़ी जल संचयन क्षमता; 2,726 सोक पिट और 66,500 ट्रेंच तैयार…

दुर्ग। बारिश की हर बूंद को सहेजकर गांवों को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में दुर्ग जिले में जल संरक्षण अभियान को जनभागीदारी से नई रफ्तार मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब गहरीकरण, चेकडेम, डबरी, Water Absorption Trench (WAT), सोक पिट, कच्ची नाली और कुआं जैसी विभिन्न जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। रोजगार गारंटी एवं विकसित भारत-जी राम जी योजना से जुड़े कार्यों के साथ ग्रामीणों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के प्रयासों को मजबूती दी है।
*गांव-गांव पहुंचा जल संरक्षण का संदेश*
अभियान के तहत बारिश के पानी को गांव में ही रोकने और जमीन में उतारने पर जोर दिया जा रहा है। पुराने तालाबों का गहरीकरण कर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाई जा रही है। चेकडेम और डबरियों के माध्यम से वर्षा जल को रोककर खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। वहीं घरों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले पानी को जमीन में पहुंचाने के लिए सोक पिट तैयार किए जा रहे हैं।
स्वप्रेरण से 2,726 सोक पिट से भू-जल रिचार्ज को बढ़ावा*
जिले के तीनों जनपद पंचायतों में अब तक 2,726 सोक पिट का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इनमें दुर्ग में 727, धमधा में 1,096 और पाटन में 903 सोक पिट शामिल हैं। इन संरचनाओं के जरिए वर्षा एवं घरेलू उपयोग के पानी को जमीन में उतारकर भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
*66,500 ट्रेंच से बारिश के पानी को जमीन में उतारने की कवायद*
जल संरक्षण की दिशा में ट्रेंच निर्माण भी बड़े पैमाने पर किया गया है। जिले में कुल 66,500 ट्रेंच का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इनमें जनपद पंचायत दुर्ग में 24,000, धमधा में 27,500 और पाटन में 15,000 ट्रेंच शामिल हैं।
ट्रेंच वर्षा जल के बहाव को धीमा कर उसे जमीन में रिसने का अवसर देते हैं। इससे जल संरक्षण के साथ भू-जल पुनर्भरण और मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
*66,500 WAT से एक बारिश में 13.3 करोड़ लीटर पानी जमीन में समाने की क्षमता*
वर्षा जल को जमीन में उतारने के लिए Water Absorption Trench (WAT) भी प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। एक ग्राम पंचायत क्षेत्र में 66,500 WAT का निर्माण कराया गया है। प्रत्येक WAT की लंबाई 2 मीटर, चौड़ाई 1 मीटर और गहराई 1 मीटर है तथा इसकी जल अवशोषण क्षमता लगभग 2 घन मीटर है।
इस तरह 66,500 WAT की कुल जल अवशोषण क्षमता करीब 1,33,000 घन मीटर यानी 13.3 करोड़ लीटर है। एक अच्छी वर्षा में इतनी मात्रा में पानी को जमीन में समाहित करने की क्षमता तैयार हुई है। इससे बारिश के पानी के बहाव को कम करने के साथ भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा।
*विकसित भारत-जी राम जी योजना से जल संरक्षण के कामों को गति*
विकसित भारत-जी राम जी योजना से जुड़े कार्यों के तहत भी जल संरक्षण की दिशा में विभिन्न कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें 246 नाली निर्माण, 71 नाला जीर्णोद्धार, 142 तालाब गहरीकरण, 28 तालाब निर्माण तथा 14 असफल नलकूपों के रिचार्जिंग कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों से वर्षा जल के संरक्षण, जल निकासी व्यवस्था और भू-जल पुनर्भरण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
*नवा तरिया से बन रहे नए जल स्रोत*
‘112 नवा तरिया’ अभियान के तहत तालाब गहरीकरण और डबरी निर्माण को भी प्राथमिकता दी गई है। जिले में 30 डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें दुर्ग जनपद में 7, धमधा में 18 और पाटन में 5 डबरी शामिल हैं। इसके साथ ही अमृत सरोवर और अन्य जल संरचनाओं के निर्माण एवं गहरीकरण के कार्य भी कराए जा रहे हैं।
*खेत और जमीन दोनों को फायदा*
जल संरक्षण संरचनाओं का सीधा लाभ खेती और ग्रामीण आजीविका को मिलने की उम्मीद है। तालाबों और डबरियों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से सिंचाई सुविधा मजबूत होगी। WAT और ट्रेंच के जरिए पानी को जमीन में रोकने से भू-जल रिचार्ज को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भविष्य में किसानों के लिए सिंचाई के जल स्रोतों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
बारिश के पानी का बहाव कम होने से मिट्टी के कटाव पर भी नियंत्रण मिलेगा। इस तरह जल संरक्षण की संरचनाएं खेत, मिट्टी और भू-जल—तीनों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं।
*जनभागीदारी बनी अभियान की ताकत*
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। जल संरक्षण को केवल सरकारी निर्माण कार्य तक सीमित न रखते हुए इसे सामुदायिक जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। ग्रामीण अपने गांव की जरूरत के अनुसार जल संरचनाओं के निर्माण और संरक्षण में सहयोग कर रहे हैं।
इससे जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ गांवों में भविष्य के लिए पानी सुरक्षित रखने की सामूहिक सोच भी मजबूत हो रही है।
*हर बूंद सहेजने का संकल्प, जल-सुरक्षित गांवों की ओर कदम*
जिले में जल संरक्षण कार्यों का उद्देश्य केवल वर्तमान जरूरत पूरी करना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए जल स्रोतों को सुरक्षित करना है। तालाब, डबरी, चेकडेम, ट्रेंच, WAT और सोक पिट जैसी संरचनाओं के जरिए वर्षा जल को अधिक से अधिक मात्रा में रोकने और भू-जल रिचार्ज करने का प्रयास किया जा रहा है।
66,500 WAT की 13.3 करोड़ लीटर तक पानी सोखने की क्षमता, 66,500 ट्रेंच और 2,726 सोक पिट जल संरक्षण के सामूहिक प्रयासों की तस्वीर सामने रखते हैं। जनभागीदारी से आगे बढ़ रहा यह अभियान ‘हर बूंद अनमोल’ के संदेश को जमीन पर साकार करते हुए दुर्ग जिले को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

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