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स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय : विश्व आदिवासी दिवस पर कला संकाय द्वारा निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन…
स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय : विश्व आदिवासी दिवस पर कला संकाय द्वारा निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन..
भिलाई। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर, हुडको, भिलाई के कला संकाय द्वारा “छत्तीसगढ़ की आदिवासी कला और सांस्कृतिक विरासत” विषय पर निबंध लेखन एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी कला, लोक परंपराओं, संस्कृति, जीवनशैली एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना तथा इसके संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूक करना था।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए निबंध एवं पोस्टर के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति के विविध पक्षों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने आदिवासी समुदायों की पारंपरिक कला, लोकगीत, लोकनृत्य, वेशभूषा, आभूषण, खान-पान, रीति-रिवाज, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली तथा लोकज्ञान को अपनी अभिव्यक्ति का विषय बनाया। पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने आकर्षक एवं संदेशपरक पोस्टरों के माध्यम से आदिवासी कला एवं संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया, वहीं निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विषय के विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय पक्षों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम प्रभारी सहा प्रा ध्यापक ज्योति मिश्रा ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी कला एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना तथा उसके संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूक करना है। विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से आदिवासी समाज की परंपराओं, लोककला, जीवनशैली एवं प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को समझने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
श्री शंकराचार्य शैक्षणिक परिषद के निदेशक डॉ. दीपक शर्मा एवं डॉ. मोनिषा शर्मा ने कहा कि, । छत्तीसगढ़ की आदिवासी कला एवं सांस्कृतिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर है। इसके संरक्षण एवं संवर्धन के साथ युवा पीढ़ी को इससे जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि, “विश्व आदिवासी दिवस केवल आदिवासी समुदाय की संस्कृति एवं परंपराओं को सम्मान देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनकी समृद्ध कला, लोकज्ञान, जीवनशैली एवं प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को समझने और उसके संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को महसूस करने का भी दिन है। छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति हमारी पहचान और गौरव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कला विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता वर्मा ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी कला एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति में प्रकृति के साथ सामंजस्य, लोकज्ञान, परंपराएं एवं कला की समृद्ध परंपरा विद्यमान है। विद्यार्थियों के माध्यम से इस विरासत को समझने, सम्मान देने तथा भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रतियोगिता के समापन अवसर पर विजेता एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विजयी प्रतिभागियों के नाम इस प्रकार है:–
पोस्टर:-
1 प्रथम स्थान लेना बी.ए प्रथम सेमेस्टर
2.द्वितीय स्थान साइना मोदक बीकॉम प्रथम सेमेस्टर
3.तृतीय स्थान उमेश सिद्ध प्रथम बी.ए सेमेस्टर
निबंध प्रतियोगिता
1.कनक टांडी प्रथम स्थान बीकॉम फर्स्ट सेमेस्टर
2.आकृति तिवारी द्वितीय स्थान बीकॉम फर्स्ट सेमेस्टर
3.हर्षिता मोदक तृतीय स्थान बीकॉम फर्स्ट सेमेस्टर
विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आदिवासी कला, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया। कार्यक्रम में कला विभाग के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। विशेष सहयोग सहायक अध्यापक गोल्डी सिंह राजपूत का रहा।
behtarsamvad
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